काली वह गर्भ हैं जहाँ समय जन्म लेता है। समय काली नहीं है, बल्कि समय काली के भीतर है।

काली वह गर्भ हैं जहाँ समय जन्म लेता है। समय काली नहीं है, बल्कि समय काली के भीतर  है।

क्या आपने कभी यह सोचा है कि जिस समय के सहारे हम जी रहे हैं, वह स्वयं कहाँ से जन्म लेता है? हम में से अधिकतर लोग माँ काली को एक मूर्ति, एक चित्र या एक उग्र रूप तक सीमित करके देखते आए हैं—रक्त, संहार और भय से जुड़ी एक छवि। शायद इसलिए, क्योंकि हमारी आँखों को वही सच लगता है जो दिखाई देता है। 

बचपन से हमें सिखाया गया कि दृश्य ही वास्तविक है। लेकिन काली को केवल देखकर समझना संभव नहीं। काली कोई आकृति नहीं हैं; काली वह अवस्था हैं जहाँ से आकृति जन्म लेती है। काली को देवी के रूप में नहीं, बल्कि उस मूल आधार के रूप में समझना होगा जिस पर हर घटना घटती है। शास्त्रों ने उनके हाथों, आयुधों और स्वरूपों का वर्णन किया, लेकिन यह सत्य को सीमित करने के लिए नहीं था, बल्कि साधक की चेतना को दिशा देने के लिए था। 

काली वह गर्भ हैं जहाँ समय जन्म लेता है। समय काली नहीं है, बल्कि समय काली के भीतर है। हमारी उम्र, हमारा शरीर, हमारी स्मृतियाँ और हमारी पहचान—सब समय की धारा में बहते हैं। लेकिन तंत्र एक सरल और गहरा प्रश्न उठाता है: यदि सब कुछ समय के भीतर है, तो समय स्वयं किसके भीतर है? यहीं से काली का वास्तविक रहस्य खुलता है।

एक साधारण उदाहरण इसे स्पष्ट करता है। बच्चा माँ के गर्भ में नौ महीने रहता है—उसका अस्तित्व होता है, विकास होता है, पूरी प्रक्रिया चलती है—फिर भी जन्म के समय उसकी आयु शून्य मानी जाती है। गर्भ में समय था, पर उसकी गणना नहीं थी। यही काली की अवस्था है। वहाँ समय बीज रूप में है—अव्यक्त, संकुचित, संभावनाओं से भरा हुआ। इसलिए तंत्र उसे परम शून्य कहता है, जो रिक्त नहीं बल्कि पूर्ण है।जीवन की नकारात्मकता को जड़ से मिटाएं: माचिस और नमक का दिव्य प्रयोग!

जब सृष्टि उस गर्भ से बाहर आती है, तभी समय की गिनती शुरू होती है। तभी “पहले” और “बाद” का भेद पैदा होता है। इसी कारण विज्ञान भी कहता है कि ब्रह्मांड के जन्म के साथ ही समय आरंभ हुआ। भारतीय दर्शन समय को सीधी रेखा नहीं, बल्कि चक्र मानता है। 

जहाँ परिवर्तन है, वहाँ समय है; और जहाँ परिवर्तन रुकता है, वहाँ समय भी अर्थ खो देता है। जहाँ द्वैत समाप्त होता है, वहाँ समय टिक नहीं सकता। इसलिए काली श्मशान में स्थित दिखाई जाती हैं—वह स्थान जहाँ नाम, रूप और इतिहास जल जाते हैं, और जो शेष रहता है वही सत्य है।

काली भय या प्रलय की सीमित परिभाषा नहीं हैं। वे वह शक्ति हैं जो अज्ञान से उपजे भय को ज्ञान से काट देती हैं। काली न केवल देवी हैं, न कल्पना—काली वह आधार हैं जहाँ से सृष्टि जन्म लेती है और जहाँ लौटकर विश्राम करती है। जहाँ समय रुक जाता है, वहीं काली हैं। जय मां काली 🔱

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