लक्ष्मीदाता बीसा यंत्र
प्राचीन तालपत्र से -----
लक्ष्मीदाता बीसा यंत्र
-------------------------
यह सिद्ध करने मे अति सहज- सरल , व्यापार या क्रय - विक्रय मे संपूर्ण कामयाबी दिलाने बीसा यंत्र है । प्रत्येक कार्य मे सफलता दायक होने से इसे विजय यंत्र भी कहा जाता है ।
इस यंत्र के दुरुपयोग की संभावना को देखते हुए हम यहाँ केवल व्यापार मे कामयाबी का ही विधान दे रहे है। इसे यदि कोई नौसिखिया भी जेब मे रखकर व्यापार करता है तो उसे भी निश्चित लाभ होता है।
सामग्री :- (1) आम की लकडी से बनी चौकी! इसमें लोहे की कील नही लगी होनी चाहिए और साधक के आसन पर बैठने के बाद इसका टाँप साधक की नाभि से ऊपर होना चाहिए। अतः इसके पाये सवा फुट के बनवा
लेने चाहिये।
(2) बारीक कपडा ( हलवाई जिसमें पनीर छांटते है वह ले लेना चाहिए।
(3) लाल गुलाल
(4) चमेली की कलम
(5) देशी गाय के घी का दीया ( इसके अभाव मे लकडी की घानी का तिल का तेल ले)।
(6)गाय के गोबर के उपले को जलाकर अंगार बनाए और इस पर गुग्गुल डालकर धूनी (धूप) दे।
(7) सवा किलो खीर व 108 देशी घी मे बनाई पुडी ।
(8)बैठने के लिए लाल रंग का ऊनी आसन।
(9)अष्टगंध की स्याही
(10)भोजपत्र
रवि पुष्य नक्षत्र मे चमेली की कलम पौधे से तोड़ लाये। किसी भी पर्व नवरात्र, गुप्त नवरात्र , दशहरा, दिवाली, हरियाली तीज, मकर संक्रांति या शुक्रवार को शुक्र की होरा मे लिखना है।
विधि:- धूप और दीपक जलाकर , आम की चौकी पर पोटली से गुलाल छींटक कर चमेली की कलम से 108 बार यंत्र लिखे। सभी रेखाये नीचे से ऊपर, बायें से दायें खींचे। अंक चढते क्रम से लिखने है यथा :- सबसे पहले 1 -2 -3 - 4 - 5 -7 -8-9 -10
गुलाल छींटक कर यंत्र लिख ले फिर गुलाल को हटाकर दोबारा गुलाल छींटक ले और यंत्र लिखे ।
इस प्रकार 108 बार लिखे।
108 की संख्या पूरी होने पर अष्टगंध की स्याही से भोजपत्र पर यंत्र लिख ले ( एक से ज्यादा भी लिख सकते है)
भोग :- भोजपत्र पर लिखे गये यंत्र - यत्रो को भोग निवेदित कर अभाव ग्रस्तो मे ( स्टेशन इत्यादि पर भूखे लोगो) बांट दे।
प्रयोग :- लिखे गये यंत्र को जेब मे रखे, नित्य धूप - दीप दिखाये । यंत्र को चांदी की डिब्बी मे रखे।
.jpg)