हनुमान जी का दिव्य शाबर मन्त्र
इस मंत्र द्वारा जातक पर किये गए सभी अभिचार प्रयोग किया -कराया, भेजा -भेजाया , खिलाया - पिलाया, लगा -लगाया ) खत्म होते है ।
लगा - लगाया का मतलब भूत - प्रेत बाधा से है किसी भी प्रकार की ऊपरी शक्तियों की बाधा को यह उसी प्रकार उडा देता है जैसे आंधी मे रुई।
शत्रु स्तंभन के लिए भी यह महान् अस्त्र है।
बंद व्यापार हनुमान जी कृपा से तुरंत खुलता है।
इस मंत्र के प्रभाव से उच्चाधिकारी मोहित होकर मित्रता पूर्वक व्यवहार करने लग जाते है।
“ॐ गर्जन्तां घोरन्तां, इतनी छिन कहाँ लगाई ?
साँझ की वेला,
लौंग-सुपारी-पान-फूल-इलायची-धूप-दीप-रोट लँगोट-फल-फलाहार मो पै माँगै।
अञ्जनी-पुत्र प्रताप-रक्षा-कारण वेगि चलो।
लोहे की गदा कील,
चं चं गटका चक कील,
बावन भैरो कील,
मरी कील,
मसान कील,
प्रेत-ब्रह्म-राक्षस कील,
दानव कील,
नाग कील,
साढे बारह ताप कील,
तिजारी कील,
छल कील,
छिद कील,
डाकनी कील,
साकनी कील,
दुष्ट कील,
मुष्ट कील,
तन कील,
काल-भैरो कील,
मन्त्र कील,
कामरु देश के दोनों दरवाजा कील,
बावन वीर कील,
चौंसठ जोगिनी कील,
मारते के हाथ कील,
देखते के नयन कील,
बोलते के जिह्वा कील,
स्वर्ग कील,
पाताल कील,
पृथ्वी कील,
तारा कील,
कील बे कील,
नहीं तो अञ्जनी माई की दोहाई फिरती रहे।
जो करै वज्र की घात, उलटे वज्र उसी पै परै। छात फार के मरै।
ॐ खं-खं-खं जं-जं-जं वं-वं-वं रं-रं-रं लं-लं-लं टं-टं-टं मं-मं-मं।
महा रुद्राय नमः।
अञ्जनी-पुत्राय नमः।
हनुमताय नमः।
वायु-पुत्राय नमः।
राम-दूताय नमः।”
विधिः
अत्यन्त लाभ-दायक अनुभूत मन्त्र है। 1008 पाठ करने से सिद्ध होता है। बिना कील लगी आम की लकडी की चौकी पर लाल वस्त्र का आसन देकर श्री राम दरबार का फोटो प्रतिष्ठापित करके , पंचोपचार पूजन करे ( स्नान, लाल चंदन, सुगंधित पुष्प, गुग्गुल की अंगार पर धूप और दीपक मे देशी घी की बती ) आम की लकडी की समिधा लेकर ध्यान पूर्वक उपरोक्त मंत्र से लाल फूल और गुग्गूल की आहुति दें। लाल लँगोट, फल, मिठाई, 5 लौंग, 5 इलायची, 1 सुपारी चढ़ा कर पाठ करें।
नियम और सावधानी :-- मंगलवार से शुरू कर मंगलवार तक 1008 जप संपूर्ण कर ले।
कम से कम 21 आहूति का यज्ञ रोज करे।
भूमि शयन करे।
ब्रह्मचर्य पालन करे।
साधना के दौरान दाढी और बाल, नाखून आदि नही काटने ।
कटु वचन किसी से न बोले।
एक वक्त माल पुओ का भोजन करे , उपलब्ध न होने पर दलिया, फल आदि एक समय ले।
इस मंत्र के साधक को हमेशा महिलाओं का सम्मान करना होता है।
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