धनप्राप्ति आर्थिक समृद्धि के सामान्य उपाय
आज के युग में सबसे महत्वपूर्ण कार्य धन प्राप्ति है। कई लोग ऐसे हैं कि अज्ञात
कारणों से उनके धन प्राप्ति में कोई न कोई रोड़ा अटकता ही रहता है। मैं उपायों का
आरम्भ धन प्राप्ति के उपायों से ही कर रहा हूँ। धन प्राप्ति के उपाय के साथ कुछ
सामान्य नियम भी बता रहा हूँ। जिस स्थान पर इन नियमों का पालन होता है, उस
स्थान पर माँ लक्ष्मी अपना स्थाई वास बनाती है।
सर्वप्रथम आपको कुछ ऐसे उपाय बता रहा हूँ जो सम्पन्नता तथा सुख-शान्ति के
लिये नियमित रूप से किये जा सकते हैं। कुछ ऐसे उपाय भी हैं जिनके बारे में आप कुछ
जानते अवश्य होंगे परन्तु यह नहीं जानते होंगे कि इनसे क्या लाभ प्राप्त हो सकता है-
* जिस घर में नियमित रूप से अथवा प्रत्येक शुक्रवार को श्रीसूक्त अथवा श्री
लक्ष्मी सूक्त का पाठ होता है, वहां माँ लक्ष्मी का स्थाई वास होता है। 1
* प्रत्येक सप्ताह घर में फर्श पर पौंछा लगाते समय थोड़ा समुद्री नमक अवश्य
मिला लिया करें। ऐसा करने से घर में होने वाले झगड़े कम होते हैं। इसके अतिरिक्त
यह भी लाभ मिलता है आपको नहीं मालूम कि आपके घर में आने वाला अतिथि कहाँ
से आ रहा है तथा उसके मन में आपके प्रति क्या विचार हैं, नमक मिले पानी से पौंछा
लगाने से सारी नकारात्मक ऊर्जा समाप्त हो जाती है।
* प्रातः उठकर सर्वप्रथम गृहलक्ष्मी यदि मुख्यद्वार पर एक गिलास अथवा लोटा
जल डाले तो माँ लक्ष्मी के आने का मार्ग प्रशस्त होता है।
* यदि आप चाहते हैं कि आपके घर में सुख-शान्ति बनी रहे तथा आप आर्थिक
रूप से समर्थ रहें तो प्रत्येक अमावस्या को पूरे घर की पूर्ण सफाई करवायें। जितना भी
फालतू सामान इकट्ठा हुआ हो उसे कबाड़ी को बेच दें अथवा बाहर फेंक दें। सफाई के
बाद पाँच अगरबत्ती घर के मन्दिर में लगायें।
* यदि आप प्रत्येक पूर्णिमा हवन कर सकें तो बहुत ही शुभ है। इसके लिये यदि
आपको कोई मंत्र नहीं आता है तो सिर्फ इतना करें कि किसी कण्डे अथवा उपले पर
अग्नि प्रज्वलित कर ॐ के उच्चारण से 108 आहुति दें। यह आपकी पूर्ण धार्मिक भावना
को दर्शाता है।
* माह में दो बार किसी भी दिन उपले पर थोड़ा से लौबान रख कर उसके धुये
को पूरे घर में घुमायें।
* यदि आपके पूजा काल में कोई मेहमान आता है तो यह बहुत शुभ है। इस समय उस मेहमान को जलपान अवश्य करायें। यदि सांध्यकाल की पूजा में कोई
सुहागिन स्त्री आती है तो आपका बहुत ही सौभाग्य है। आप यह समझे कि आपके घर
माँ लक्ष्मी का प्रवेश हो चुका है।
* आप जब भी घर वापिस आयें तो कभी खाली हाथ न आयें। यदि आप बाजार
कुछ लाने की स्थिति में नहीं हैं तो रास्ते से एक कागज का टुकड़ा ही उठा लायें।
से
* आपकी साधना अर्थात् पूजाकाल में कोई बच्चा रोता है तो यह आपके लिये
शुभ नहीं है। इसके लिये आप किसी ज्ञानी व्यक्ति से सम्पर्क कर पता लगायें कि क्या
वजह है। इसका सामान्य कारण यह हो सकता है कि आपके घर में कोई नकारात्मक
शक्ति अवश्य है।
* आपके निवास में आग्नेय कोण (पूर्व व दक्षिण का कोना) में यदि गलती से
कोई पानी की व्यवस्था हो गई है तो यह वास्तु शास्त्र के अनुसार बहुत बड़ा दोष है।
इसके लिये आप उस स्थान पर 24 घण्टे एक लाल बल्ब जलता रहने दें। सांध्यकाल
में उस स्थान पर एक दीपक अवश्य रखें।
* घर में कभी नमक किसी खुले डिब्बे में न रखें।
* घर के जितने भी दरवाजे हों, उनमें समय-समय पर तेल अवश्य डालते रहना
चाहिये। उनमें से किसी भी प्रकार की कोई भी आवाज नहीं आनी चाहिये।
* घर में यदि किसी दिन कोई बच्चा सुबह उठते ही कुछ खाने को मांगे अथवा
बिना कारण के रोने लगे तो उस दिन घर के प्रत्येक सदस्य को सावधान रहने की
आवश्यकता है क्योंकि यह बात कुछ अशुभता को दर्शाती है।
* कभी भी किसी को दान दें तो उसे घर की देहरी में अन्दर न आने दें। दान
घर की देहरी के अन्दर से ही करें।
* यदि नियमित रूप से घर की प्रथम रोटी गाय को तथा अन्तिम रोटी कुत्ते को
दें तो आपके भाग्य के द्वार खुलने से कोई नहीं रोक सकता है।
* आप अपने निवास में कुछ कच्चा स्थान अवश्य रखें। यदि सम्भव हो तो यह
घर के मध्य स्थान में हो। यदि यहां तुलसी का पौधा लगा है तो फिर आपके कार्यों में
कभी रुकावट नहीं आ सकती।
* आप यदि अपने व्यस्त जीवन में गुरुवार को केले के वृक्ष पर सादा जल अर्पित
कर घी का दीपक तथा शनिवार को पीपल के वृक्ष में गुड़, दूध मिश्रित मीठा जल व
सरसों के तेल का दीपक अर्पित कर सकें तो कभी भी आर्थिक रूप से परेशान नहीं होंगे।
* आर्थिक सम्पन्नता के लिये आप नियम बना लें कि नित्य ही किसी भी पीपल
के वृक्ष में जल अवश्य दें।
आर्थिक समृद्धि के उपाय
अब मैं आपको कुछ ऐसे आर्थिक नियम व उपाय बता रहा हूँ कि जिन नियम पर
चलकर तथा उपाय कर आप विपन्नता से मुक्ति पा सकते हैं:-
* आप अपने व्यस्त जीवन में यदि श्री 'श्रीयंत्र' के सामने नियमित रूप से अथवा
प्रत्येक शुक्रवार को श्री 'श्रीसूक्त' तथा बीजयुक्त 'लक्ष्मी सूक्त' का पाठ कर सकें तो कभी
भी आर्थिक समस्या से ग्रस्त नहीं रहेंगे। इसका प्रभाव आप स्पष्ट रूप से सात शुक्रवार
के पाठ से ही देखने लगेंगे।
* यदि आप इस उपाय को वर्ष में सिर्फ दो बार अर्थात् एक बार जनवरी माह
में तथा एक बार जुलाई माह में करेंगे तो घर में माँ लक्ष्मी का स्थाई वास होगा। यदि
आप शनि प्रकोप से भी ग्रस्त हैं तो उसमें भी आपको मुक्ति मिलेगी। इसके लिये शुक्ल
पक्ष के प्रथम रविवार को मध्याह्न 12 बजे अपने परिवार के सभी सदस्यों के साथ बैठ
जायें। एक सूखा नारियल लें। एक प्लेट में 250 ग्राम पिसी शक्कर अथवा बूरे के साथ
5 रुपये की पंचमेवा लें। नारियल में चाकू की मदद से खोपरे के नुकीले हिस्से पर इतना
बड़ा छेद करें की उसमें आपकी अंगुली प्रवेश कर जाये। फिर बूरे में पंचमेवा मिलाकर
सभी सदस्य बारी-बारी से बूरे को खोपरे में भरें। इस बीच कोई आपस में बात नहीं
करें। मानसिक रूप से 'श्रीं श्रिययै नमः' का जाप करें। खोपरा जब बूरे से भर जाये
तो घर का मुखिया खोपरे को किसी पीपल के वृक्ष के नीचे लगभग एक हाथ गड्ढा कर
दबा दे। मिट्टी भर कर गड्ढा बन्द कर दें। जो बूरा बचा है उसे गड्ढे के आसपास फैला
दें। गड्ढे के ऊपर कोई बड़ा पत्थर अवश्य रख दें जिससे कोई जानवर खोद कर खोपरा
न निकाले। अब घर वापिस आ जायें। इसकी सार्थकता जानें कि आपने विश्व के सबसे
निर्बल जीव चींटीयों के लिये कितने समय के भोजन की व्यवस्था कर दी है, तो फिर
ईश्वर आपकी प्रार्थना क्यों नहीं स्वीकार करेगा ? शनि प्रकोप से बचने के लिये नियमित
'कीड़ी नगरा सीचें' अर्थात् चींटीयों को भोजन दें। यह भी आपने किया। आपने एक ही
कार्य से तीन लाभ लिये। प्रथम, माँ लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त किया। दूसरा,
शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया तथा आपने ईश्वर को भी प्रसन्न किया। जब आपसे
ईश्वर, माँ लक्ष्मी तथा शनिदेव प्रसन्न हैं तो आप स्वयं सोच सकते हैं कि आपको
क्या-क्या लाभ तथा फल प्राप्त होंगे।
* शुक्रवार की शाम को एक नया ताला खरीदें। ताला किसी भी साईज का हो
सकता है। ताला खरीदते समय यह अवश्य ध्यान रखें कि ताले को कोई अन्य आपके
सामने खोले नहीं। यह बात मैं आपको इसलिये बता रहा हूँ कि जैसे ताला बेचने वाले अधिकतर ताला देते समय चैक करने के लिये उसे खोलते-बन्द करते हैं परन्तु यह क्रिया
आप न करने दें। आप यही कहें कि हमें एक ताला चाहिये और उसे चैक न करने दें।
उस ताले को आप अपने उस कक्ष में रखें जिस कक्ष में आप सोते हैं। अगले दिन अर्थात्
शनिवार को सांध्यकाल में स्नान कर उस ताले को लेकर किसी भी मन्दिर में जायें।
प्रार्थना करने के बाद उस ताले को मन्दिर में ही छोड़ आयें। अब जब भी मन्दिर का
पुजारी उस ताले को खोलेगा तो आपकी किस्मत का ताला तथा माँ लक्ष्मी की तिजोरी
का ताला एक साथ खुल जायेगा।
* यदि आप आर्थिक रूप से परेशान हैं तो आपको एक बहुत ही सामान्य उपाय
बता रहा हूँ। किसी भी रात्रि में आप 3 से 5 बजे के मध्य उठें तो अपने निवास के उस
खुले स्थान में आ जायें जहां से आसमान दिखाई देता हो। पश्चिम दिशा की ओर मुख
करके अपने दोनों हाथ के पंजों को इस प्रकार मिला लें जैसे आप कुछ मांग रहे हो। फिर
आकाश की ओर देखते हुए माँ लक्ष्मी से आपनी सम्पन्नता की भीख इस प्रकार से मांगे
जैसे कोई पुत्र अपनी माँ से कुछ मांगता है। मांगते समय आप इतने भाव-विहल हो जाये
कि आपके आँसू निकल आयें। आप मन से माँ लक्ष्मी से निवेदन करें और फिर दोनों
हथेलियों को अपने मुख पर फेर लें। कुछ ही दिन में चमत्कार देखें।
* आप यदि प्रत्येक गुरुवार को किसी सुहागिन स्त्री को सुहाग सामग्री दान करें
तो भी आपकी आर्थिक समस्याओं का समाधान होगा। ऐसा आप लगातार पाँच गुरुवार
करें। इसमें यह आवश्यक नहीं है कि सुहाग सामग्री में बहुत कुछ हो। सुहाग सामग्री का
निर्णय आप अपनी आर्थिक सुविधानुसार कर सकते हैं।
* यदि आर्थिक समस्या से जूझ रहे हैं अथवा आपके कामों में अचानक कोई
रुकावट आती हो तो आप शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से लगातार तीन गुरुवार को गरीबों
में मीठे पीले चावल दें। यह एक ऐसा उपाय है कि तीन बार करने पर अर्थात् 9 गुरुवार
को करने पर आपको इतना लाभ प्राप्त होगा कि आप फिर कभी भी इस उपाय को
बन्द नहीं करेंगे। इसमें यह आवश्यक नहीं है कि चावल बहुत ही हों। आप यदि एक
किलो चावल भी बनवायेंगे तो भी पर्याप्त है। आप यदि इस उपाय को बार-बार करने
के इच्छुक हों तो एक बार के तीन गुरुवार करने के बाद एक गुरुवार को रोक दें तथा
फिर आरम्भ कर दें।
* आजकल हर व्यक्ति यह चाहता है कि वह कभी भी आर्थिक समस्या में नहीं
आये। अब मैं आपको ऐसा उपाय बता रहा हूँ जिसे करने से आप कभी भी धन के लिये
समस्याग्रस्त नहीं रहेंगे। इसमें आप सर्वप्रथम तो अपने घर में तथा यदि कोई
व्यावसायिक प्रतिष्ठान हो तो वहां भी शाम के समय अर्थात् सूर्य डूबने से पहले
दीया-बत्ती अवश्य करें। घर व प्रतिष्ठान की सारी लाईट अवश्य जला दें तथा मन्दिर
के सामने कोई भी लक्ष्मी जी का मंत्र 11 बार मानसिक रूप से अवश्य पढ़ें।
* अब मैं आपको एक बहुत ही प्रभावशाली उपाय बता रहा हूँ। यह उपाय
लगातार 9 दिन का है हालांकि उपाय में अधिक समय नहीं लगेगा लेकिन कई लोग 9
दिन को भी बन्दिश मानते हैं, परन्तु कुछ पाने के लिये कुछ तो करना ही होता है। वैसे
भी माँ लक्ष्मी कर्मठ लोगों के घर में स्थाई वास करती हैं। आप प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष
की प्रथमा तिथि से यह उपाय आरम्भ कर सकते हैं। इसके लिये आपको कमलगट्टे की
माला की आवश्यकता होगी। प्रथमा तिथि को सांध्यकाल में किसी स्वच्छ स्थान में
पश्चिम की ओर मुख कर बैठ जायें। अपने सामने एक पट्टे पर लाल कपड़ा बिछायें।
थाली में 11 लाल गुलाब, प्रसाद तथा कुछ पैसे रख लें। कलावे अथवा मौली की बत्ती
वाला शुद्ध घी का दीपक बनाकर माँ लक्ष्मी का मानसिक स्मरण कर सर्वप्रथम लाल
गुलाब अर्पित करने के बाद दीपक तथा अगरबत्ती-धूप अर्पित करें। फिर प्रसाद अर्पित
करें। इसके बाद किसी जलते कण्डे या उपले पर थोड़ा सा कपूर रखें। कपूर के ऊपर
एक बताशा तथा बताशे पर लौंग का जोड़ा रखें। थोड़ी ही देर में सुगंध से वातावरण
शुद्ध हो जायेगा। फिर आप आँखें बन्द कर माँ लक्ष्मी का स्मरण कर धीरे-धीरे पाँच
गहरी साँस लें। फिर कमलगट्टे की माला से माँ लक्ष्मी के मंत्र की एक माला का जाप
करें। यदि आपको कोई मंत्र ज्ञात नहीं है तो आप 'श्रीं' अथवा 'श्रीं श्रिययै नमः' का जाप
कर सकते हैं। जाप के पश्चात् गुलाब उठाकर किसी शुद्ध स्थान पर रख दें। प्रसाद
बच्चों में बाँट दें। जो पैसे रखे थे, उसे आप अपने प्रयोग में ला सकते हैं। 9 दिन तक
अर्थात् नवमी तक आप यही प्रक्रिया करें। नवमी को सारे गुलाब इकट्ठे कर उसी लाल
कपड़े में बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। अब यदि अगले माह फिर यह
प्रयोग करना चाहते हैं तो पिछले माह वाले गुलाबों को कपड़े सहित विसर्जित कर दें।
इस बार के प्रयोग के गुलाब फिर धन के स्थान पर रख दें। कुछ ही समय में आप देखेंगे
कि माँ लक्ष्मी का आपके निवास में स्थाई वास हो गया है।
* इसी प्रकार का एक प्रयोग और है। किसी माह के कृष्णपक्ष की अष्टमी अथवा
चतुर्दशी को आप माँ दुर्गा की तस्वीर के सामने कुछ रुपये तथा अपने कर्म क्षेत्र की
महत्वपूर्ण वस्तु उदाहरण के लिये अध्यापक के लिये उसकी कलम (पैन) बहुत महत्वपूर्ण
होता है, इसी प्रकार आपके लिये जो महत्वपूर्ण वस्तु हो उसको भी रुपये के साथ रख
दें। फिर माँ दुर्गा को धूप अर्पित करने के साथ कुछ प्रसाद भी अर्पित कर दें। माँ दुर्गा
का कोई स्तोत्र, चालीसा अथवा कोई भी पाठ करें। पूजा के बाद माँ दुर्गा से अपनी
सम्पन्नता का निवेदन करें। रखे हुए रुपये तथा जो भी वस्तु रखी है उसके लिये प्रार्थना
करें कि "हे माँ, यह धन और कलम अथवा जो भी आपने रखा हो, मैं तेरा प्रसाद मानकर
अपने प्रयोग के लिये ले रहा हूँ। मुझे विश्वास है कि तू मेरी प्रार्थना स्वीकार कर मुझे
अनुग्रहित करेगी।" इसके बाद रुपये और वह वस्तु उठा लें। हाथ जोड़कर पूजा स्थान
से बाहर आ जायें। अर्पित प्रसाद को 9 वर्ष से कम आयु की कन्यायों को बांट दें। रुपये
और वह वस्तु माँ दुर्गा का प्रसाद मानकर अपने प्रयोग में लायें। इसके बाद आप स्वयं
चमत्कार देखेंगे। इस प्रयोग से आपकी हर पूजा माँ दुर्गा को स्वीकार होगी क्योंकि इस
प्रयोग को शास्त्रों में 'ददगति प्रतिग्रहणाति' कहते हैं। जब तक जो व्यक्ति इस प्रयोग को
नहीं करता हैं तो उसे कम से कम माँ दुर्गा की पूजा नहीं लगती है। फिर जब भी किसी
परेशानी में आप आयें तो सिर्फ वह पाठ, जो पाठ आपने प्रयोग में किया था करें। माँ से
अपनी परेशानी से मुक्ति का निवेदन करें। आप बहुत ही जल्दी उस परेशानी से मुक्ति
पा जायेंगे।
* आप घर में नियमित रूप से पूजा करते समय जो दीपक जलाते हैं, उसमें
रूई की बत्ती के स्थान पर कलावा अर्थात् मौली का प्रयोग करें क्योंकि माँ लक्ष्मी को
लाल रंग अधिक प्रिय है।
* आर्थिक वृद्धि के लिये आप सदैव शनिवार के दिन गेहूँ पिसवायें तथा गेहूँ में
एक मुट्ठी काले चने अवश्य मिला दें।
* जब भी आप रुपये गिनें तो उसमें कभी भी थूक का प्रयोग न करें। अक्सर
आपने देखा होगा कि लोग रुपये गिनने में अंगुली पर थूक लगाकर रुपये गिनते हैं। यह
माँ लक्ष्मी का अपमान होता है क्योंकि रुपये माँ लक्ष्मी का स्वरूप हैं।
* यदि आपके घर में पहली संतान के रूप में पुत्र रत्न का जन्म हुआ है तो
उसके दाँत आने के बाद पहले दाँत गिरने के समय में विशेष ध्यान रखें। जब भी उसका
दाँत गिरे तो उस दाँत को धरती पर गिरने से पहले ही हाथ में उठाकर किसी शुद्ध
स्थान पर रख दें। अब जब भी कभी गुरुपुष्य आये अर्थात् किसी गुरुवार को पुष्य नक्षत्र
हो तो उस दाँत को सर्वप्रथम गंगाजल से शुद्ध करें। फिर अगरबत्ती दिखाकर चांदी की
डिब्बी में रख दें। उस डिब्बी को सदैव अपने पास अथवा धन रखने के स्थान पर रख
दें। माह में एक बार जिस नक्षत्र में बच्चे का जन्म हुआ हो उसी नक्षत्र में दाँत को
पिछली बार की तरह शुद्ध कर अगरबत्ती दिखाकर सूर्यदेव के दर्शन करवा कर पुनः
डिब्बी में रख दें। ऐसा प्रत्येक माह किया करें। आप स्वयं देखेंगे कि जिस स्थान पर
दाँत रखा है, वहां कभी धन की कमी नहीं आयेगी। यह उपाय तभी सिद्ध होता है जब
आप दाँत को जमीन पर गिरने से पहले ही हाथ में ले लेंगे।
* अक्सर मंदिर में अनेक भक्त चढ़ावे के रूप में रुपये-पैसे अपने इष्ट की ओर
उछालते हैं। आपके सौभाग्य से किसी के द्वारा मन्दिर में रुपये-पैसे चढ़ाते समय कभी
कोई सिक्का अथवा रुपया आपकी झोली में अथवा आपके ऊपर गिर जाये तो आप
बिना किसी झिझक के वह सिक्का माँ लक्ष्मी का प्रसाद मानकर अपने पास रख लें। यह
आपके लिये बहुत ही सौभाग्य की बात है। मन्दिर में माँ लक्ष्मी ने स्वयं आपको धनवान
बनाने का आरम्भ किया है।
* आपसे जब भी कोई हिजड़ा कुछ मांगने आये तो उसे यथासामर्थ्य धन दें।
उससे निवेदन करें कि वह अपने पास से अपना सिक्का अथवा रुपया आपको दे दे। वह
सिक्का आप अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। यदि वह दिन बुधवार का हो तो बहुत
ही सौभाग्य की बात है। हिजड़ों का दिया सिक्का बहुत शुभ होता है। इसमें यह अवश्य
ध्यान रखें कि वह जो भी सिक्का अथवा रुपया दे, वह आपका दिया न हो।
* किसी बुधवार के दिन यदि आपके सामने कोई हिजड़ा आ जाये तो आप उसे
अपनी सामर्थ्य से कुछ पैसा अवश्य दें चाहे वह स्वयं आपसे कुछ भी न मांगे।
* दीपावली से अट्ठारह दिन पहले कोई लोहे की चपटे आकार की चाबी लें।
उसे गंगाजल आदि से शुद्ध कर रामायण के 10-11वें पृष्ठ के मध्य रख दें। रामायण की
धूप-दीप से पूजा अर्चना कर रामायण में जो भी चौपाई आपको प्रिय हो उसका एक बार
पाठ करें, फिर रामायण बन्द कर रख दें। अगले दिन फिर यही क्रिया करनी है। बस,
इसमें आपको चाबी कुछ पृष्ठ छोड़कर अगले पृष्ठों के मध्य रखनी है तथा धूप-दीप से
वही चौपाई का पाठ करना है। ऐसा आप नित्य अट्ठारह दिन तक करें। अब अन्तिम
दिन दीपावली पर जिस पृष्ठ पर चाबी है उससे पाँच पृष्ठ पीछे से पढ़ना आरम्भ करें।
जिस पृष्ठ पर चाबी थी उस पृष्ठ तक पाठ करें। इसके बाद पूर्ण श्रद्धा से चाबी को
निकाल कर किसी लाल अथवा पीले वस्त्र में लपेट कर धन रखने के स्थान पर रख दें।
इसमें यह बात अवश्य ध्यान रखनी है कि पहले दिन जैसी पूजा आपने की है वैसी ही
पूजा नित्य हो तथा प्रत्येक दिन अगले कुछ पृष्ठ छोड़कर चाबी रखते जायें। अन्तिम दिन
की पूजा आप दीपावली पूजन के साथ ही करें।
* हिन्दू धर्म में मान्यता है कि धनतेरस पर कोई नया बर्तन खरीदा जाता है। आप
धनतेरस के दिन कोई छोटी सी चांदी की डिब्बी खरीद कर लायें। दीपावली पूजन के
समय उस डिब्बी को शुद्ध कर उसके साथ थोड़ी सी नागकेसर तथा कचनार के पत्ते लें।
यदि कचनार के पत्ते उपलब्ध न हों तो आप शहद भी ले सकते हैं। सारी सामग्री का
पूजन आप दीपावली पूजन के साथ ही करें। वह सामग्री माँ लक्ष्मी की तस्वीर के सामने
रात भर रखी रहने दें। अगले दिन प्रातः स्नान करने के बाद डिब्बी में नागकेसर व
कचनार के पत्ते अथवा शहद को लेकर डिब्बी बन्द कर दें। डिब्बी को किसी लाल
अथवा पीले वस्त्र में बांध कर धन रखने के स्थान पर रख दें। वर्ष भर माँ लक्ष्मी की
अनुकम्पा आप पर बनी रहेगी।
* धनतेरस पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी सुनार से चांदी के पत्तर को
कटवा कर "श्री" के रूप में कटवायें (यह किसी भी नाप का हो सकता है जितनी
आपकी सामर्थ्य है)। दीपावली की रात्रि में पूजन के मध्य आप इसको शुद्ध कर
एक-एक नागकेसर लेकर किसी भी वस्तु से चिपकाते जाये तथा कोई भी माँ लक्ष्मी का
मंत्र मन ही मन पाठ करते जायें। जब चांदी का "श्री" नागकेसर से पूरी तरह से ढक जाये तो उसका भी पूजन दीपावली पूजन के साथ करें। प्रातः स्नान कर "श्री" को किसी
भी लाल-पीले वस्त्र में लपेट कर धन के स्थान पर रख दें। यह यंत्र आपको जीवन भर
विपन्नता से मुक्त रखेगा।
* किसी भी शुक्लपक्ष के प्रथम शनिवार को 10 बादाम लेकर किसी भी हनुमान
मन्दिर में जायें। वहां पर बादाम रख दें। जो भी पूजा-पाठ आपको करनी है, वह करें
और वापिस आ जायें। वापिस आते समय पाँच बादाम मन्दिर में ही छोड़ आयें तथा पाँच
बादाम घर लाकर किसी भी लाल वस्त्र में बांधकर धन के स्थान पर रख दें।
* दीपावली पूजन के साथ एक लकड़ी की डिब्बी, थोड़ा सा सिन्दूर तथा 3
अभिमंत्रित गोमती चक्र का पूजन करें। प्रातः स्नान के बाद लकड़ी की डिब्बी में एक
परत सिन्दूर की बिछायें। उसके ऊपर गोमती चक्र रख कर सिन्दूर से पूरी डिब्बी भर
दें फिर डिब्बी को किसी लाल-पीले वस्त्र में लपेट कर धन के स्थान पर रख दें।
* घर में रखने के लिये सिद्ध 'श्रीयंत्र' प्राप्त करें। उसमें और अधिक माँ लक्ष्मी
की शक्तिपात के लिये आप किसी भी शुक्रवार को श्री लक्ष्मीनारायण मन्दिर अथवा किसी
भी माँ लक्ष्मी के मन्दिर में उस यंत्र के साथ 11 अथवा 21 श्री लक्ष्मी सहस्त्रनाम की
पुस्तकें लेकर जायें। यंत्र को माँ लक्ष्मी की मूर्ति के चरणों में रखकर उनके सामने मन्दिर
में ही बैठ कर एक बार श्री लक्ष्मी सहस्त्र नाम का पाठ करें। फिर एक पुस्तक तथा यंत्र
वापिस ले आयें। बाकी पुस्तकें वहीं छोड़ दें। यंत्र को अपने पूजा स्थान में लाल कपड़े
पर स्थान दें। कुछ ही दिनों में स्पष्टतः आपको चमत्कार दिखाई देगा।
* यदि आप आर्थिक रूप से बहुत ही समस्या ग्रस्त हैं तो आप 21 शुक्रवार को
9 वर्ष से कम आयु की पांच कन्यायों को खीर व मिश्री का प्रसाद बांटें।
* इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कभी भी दोनों समय घर में झाडू न लगायें।
* यदि किसी शुक्रवार को कोई सुहागिन स्त्री आती है तो उसका अवश्य ही
सम्मान कर जलपान करायें।
* अब मैं आपको स्थाई आर्थिक सम्पन्नता के लिये उपाय बता रहा हूँ। यदि
आपने यह प्रयोग कर लिया तो आप सदैव के लिये आर्थिक विपन्नता से मुक्ति पा
जायेंगे। आप यह प्रयोग दीपावली की रात्रि से कर सकते है। दीपावली की रात्रि में आप
एक मोती शंख अथवा दक्षिणावर्ती शंख को दीपावली पूजन के साथ ही पूजें। किसी भी
लक्ष्मी मंत्र की पाँच माला जपें। शंख को पूजास्थान में ही रख दें। अगले दिन प्रातः स्नान कर लाल आसन पर बैठकर अपने सामने शंख को रख कर उसी मंत्र का पाठ करें।प्रत्येक मंत्र के बाद एक साबुत चावल का दाना शंख में डालें। इस प्रकार आप 108 बार मंत्र पाठ कर इतने ही चावल के दानें शंख में डालें। इस प्रकार आप प्रत्येक दिन मंत्र पाठ करें। यह आपको तब तक करना है कि जब तक शंख चावलों से भर नहीं जाये।
जिस दिन शंख भर जाये, उस दिन शाम को एक सुहागिन, पाँच 9 वर्ष से कम की
कन्यायें तथा एक ब्राह्मण को भोजन करा कर दक्षिणा देकर विदा करें तथा शंख को
किसी लाल वस्त्र में बांध कर अपने धन रखने के स्थान पर रख दें। जिस दिन आप यह
प्रयोग समाप्त करें, उससे अगले दिन से लगातार 40 दिन तक धूप अवश्य दिखायें। इसके
बाद आप शंख को भूल जायें। आपके इस प्रयोग से माँ लक्ष्मी का आपके यहां स्थाई वास
होगा। इस प्रयोग की चर्चा किसी से भी नहीं करनी है तथा इस प्रयोग में आप जिन
चावलों का प्रयोग करें वह पूर्णतः साबुत होने चहिये अर्थात् अखण्डित हाँ।
* आप जब भी बैंक अथवा किसी अन्य स्थान पर धन जमा कराये तो उस समय
मन ही मन लक्ष्मी जी का कोई मंत्र अवश्य जपना चहिये। इससे आपको धन जमा कराने
का अधिक अवसर प्राप्त होगा।
.
* आप दीपावली की रात्रि में सफेद रंग के 21 हकीक पत्थर लें। इन्हें पंच तत्व
से शुद्ध करने के बाद दीपावली पूजन के साथ पहले पूजें। उसके बाद 11 माला “ॐ
श्रीं श्रिययै नमः" का जाप करें। अगले दिन आप उन सभी हकीक को एक लाल रेशमी
वस्त्र में बांधकर अपने व्यवसाय स्थल में धन रखने के स्थान पर रख दें। इनके प्रभाव
से आपके व्यापार में दिनोंदिन अधिक उन्नति होगी।
* आर्थिक स्थिरता के लिये दीपावली की रात्रि में 21 हकीक अपनी तिजोरी
अथवा धन रखने के स्थान से उसार कर अपने घर के मध्य स्थान में गाड़ दें। कुछ ही
समय में आप घर की आर्थिक स्थिति में परिवर्तन देखेंगे।
* यदि आप चाहते हैं कि आपके पास सदैव धन रहे तथा आप जिस भी क्षेत्र में
हाथ डालें, वहां आपको सफलता प्राप्त हो तो आप दीपावली की रात्रि में एक असली
स्फिटिक की माला से "ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं" मंत्र का 11 माला जाप करें। इस प्रकार
दीपावली की रात्रि से लगातार 40 दिन तक मंत्र जाप करें। 40वें दिन उस माला को
स्वयं धारण कर लें। उस दिन 9 वर्ष से कम आयु की कन्या को भोजन करायें व दक्षिणा
देकर चरण स्पर्श करें। यह ध्यान रखना है कि जब तक मंत्र पूर्ण न हो, तब तक माला
पूजा स्थान पर ही रहेगी। इस उपाय से माँ लक्ष्मी की कृपा से आप पर कभी धन की
कमी नहीं रहेगी।
* कोई भी व्यक्ति कभी दुर्भाग्यशाली नहीं होता है। सारा खेल समय का है। फिर
भी यदि आपके मन में यह बात घर कर गई है कि आप दुर्भाग्यशाली हैं तो आप
दीपावली की रात्रि में अपने घर में पारद की माँ लक्ष्मी की मूर्ति को स्थान दें तथा
दीपावली की रात्रि से लेकर लगातार 40 दिन तक 11 माला नित्य “ॐ ऐं ऐं श्रीं श्रीं ह्रीं
ह्रीं पारदेश्वरी सिद्धि ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं ऐं ऐं ॐ" का जाप करें। 40वें दिन किसी सुहागिन
को भोजन करायें। इससे पहले आप किसी पाटे पर लाल रेशमी वस्त्र बिछा कर उस
पर हल्दी से रंगे पीले चावलों से "स्वास्तिक" बनायें। स्वास्तिक के ऊपर तांबे की प्लेट
पर हल्दी से ही "श्रीं" लिखकर गुलाब पुष्प की पंखुड़ियों पर पारदेश्वरी माँ लक्ष्म
Tags
दिव्य प्रयोग